ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग पत्थलगांव के SDO अमित देव की तानाशाही चरम पर..शासन के निर्देश के बावजूद मुरमीकरण कार्य के सैंकड़ो तकनीकी स्वीकृति..बिना कमीशन नही होता कार्यो का मेजरमेंट..मुख्यालय से रहते है नदारद

मुकेश अग्रवाल 

 

पत्थलगांव – पत्थलगांव के जनपद अंतर्गत अनुविभागीय अधिकारी ग्रामीण यांत्रिकी सेवा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अमित देव की तानाशाही इन दिनों चरम पर है पंचायत के विकास कार्यो की सैंकड़ो फ़ाइले इनकी अलमारी में बंद है जो पंचायत के जनप्रतिनिधि इनके मन मुताबिक कमीशन देते है उनके कार्यो के कमी के बावजूद फ़ाइल आगे बढ़ा दी जा रही है लेकिन जो छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव सरकार की नीति के अनुरूप कमीशन देने से मना करते है या SDO के मन मुताबिक कमीशन नही देते है उनकी फ़ाइल या तो रोक दी जाती है या फिर उनके सही कार्य का भी गलत मेजरमेंट करने को अपने इंजीनियर को दबाव डाला जाता है।

 

शासन ने अनुदान राशियों के दुरुपयोग को देखते हुए खनिज संपदा को बचाने हेतु ग्राम पंचायतों में मुरमीकरण के कार्य पर रोक लगाई थी लेकिन शासन के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए अनुविभागीय अधिकारी ग्रामीण यांत्रिकी सेवा पत्थलगांव अमित देव के द्वारा सैंकड़ो मुरमीकरण के कार्यो का टेक्निकल सेंक्शन किया गया है और आधे और गलत काम का मेजरमेंट कर भुगतान करवाया गया है मुरमीकरण के कार्यो की जांच हो तो बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता है।

 

SDO की तानाशाही और गलत रवैये से इन दिनों क्षेत्र के रोष व्याप्त है,पंचायत के प्रतिनिधि हो सचिव हो या स्थानीय जनप्रतिनिधि हो SDO की कार्यशैली से परेशान है यहां तक कि इनके अधीनस्थ कर्मचारी भी दबे मुंह पीछे से इनकी कार्यशैली पर सवाल उठाते नजर आ रहे है इनके कार्यकाल में समस्त कार्यो की जांच की जाए तो इनके द्वारा किये गए गलत मेजरमेंट और तकनीकी स्वीकृति की अनेक फ़ाइल निकलेंगी।सूत्रों के मुताबिक इनकी शिकायत के बाद राज्य शासन व मंत्रालय से SDO की शिकायत जांच हेतु पत्र जारी हुआ था आपको बता दे कि पत्थलगांव मुख्यमंत्री का गृह जिला है लेकिन शासन से जांच पत्र आया वह भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया।

 

जानकार बताते है कि SDO अमित देव का पत्थलगांव होने के बावजूद ये यहां नही रहते है उच्चाधिकारी के पूछने पर फील्ड का बहाना करके अम्बिकापुर ही निवास करते है जबकि मुख्यालय छोड़ने से पहले उच्च अधिकारी से अनुमति लेनी होती है लेकिन सप्ताह में 2 दिन छोड़कर बाकी दिन ये साहब नदारद रहते है लेकिन कोई पूछने वाला नही है ना ही कही इनकी हाजरी दर्ज होती है जबकि शासन से जिनको भी मानदेय मिलता है उनकी हाजरी दर्ज होती है लेकिन इनकी हाजरी कहा साइन होती है किसी को नही पता।

अब देखना होगा कि ऐसे गंभीर मामले में शासन प्रशासन किस प्रकार जांच कर क्या कार्यवाही करती है।

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