पत्थलगांव का इंदिरा गांधी चौक देखरेख के अभाव में हुआ गढ्ढे में तब्दील एन एच विभाग शहर की सुंदरता पर लगा रहा बट्टा

पत्थलगांव/मुकेश अग्रवाल
पत्थलगांव शहर के ह्रदय स्थल इंदिरा चौक राष्ट्रीय राजमार्ग 43 सड़क की स्थिति देख कर लगेगा की इससे अच्छे तो गाँव के चौक चौराहे होते है।
इंदिरा चौक राष्ट्रीय राजमार्ग 43 की सड़क देख कर सोचिए क्या राष्ट्रीय राजमार्ग नाम की कोई विभाग है भी की नही स्थिति बद से बत्तर आने जाने लायक सड़क ही नही है लोग बेबस और लाचार राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों और प्रशासन की तरफ निगाहे पर न कोई देखने वाला न कोई सुनने वाला और आवगमन में भारी परेशानियों का सामना कर रहे लोग


सुबह शाम जब देश की भविष्य गढ़ने अपने स्कूल के लिए स्कूली बच्चे जब यहां से गुजरते होंगे तो वे वे समझते होंगे कि शहर के बड़े बड़े गड्ढे को देख कर सबन्धीत विभाग शहर के नेताओ और प्रशासन स्तर के अधिकारियों के बारे में सोचते होंगे कि क्या कोई जिम्मेदारी भी होती होगी या सब इसी तरह चलता होगा इन खराब सड़को को कब बनाया जाता है। बच्चे तो बच्चे है वे क्या जाने की ब्यवस्थाये बनाने की जिम्मेदारी जिनके कंधों के ऊपर है। वे ही अपनी आंखें बंद किये हुए वहां से आगे गुजरते जरूर है। पर इसे ठीक करने में अपनी रुचि नही दिखाते
शहर के हर एक आम शहरी को अच्छी सड़क चाहिए और वो राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों के तरफ देखता है। पर ये विभाग शुरू से ही पत्थलगांव शहर के लिए अपवाद बना हुआ है इनके अधिकारी सप्ताह में तो क्या वर्षो वर्षो तक शहर में नही दिखते ये अपनी शक्ल यदा कदा तब दिखाते है जब कोई बड़ा अधिकारी या बड़ा नेता यहां आएंगे तब ये विभाग के अधिकारि कभी दिखेंगे नही तो शहर के लोग तो राष्ट्रीय राजमार्ग के इंजीनियर से लेकर एसडीओ और प्रभारी ईई को नही जानते
बुधवार की सुबह इंदिरा चौक के पास बिलई टाँगर के बिंदेस्वरी शर्मा बाल बाल बचे अपनी स्कूटी से जब पार हो रहे थे तो वे सोचे कि पानी है पर जब पार कर रहे थे तो वे अपनी स्कूटी से उस गड्ढे में घुस कर गिर गए अगल बगल के लोग उन्हें गिरा देख कर बचाने आगे आये और उन्हें उठाया इस बात पे बिंदेस्वरी शर्मा ने बताया की आज बस स्टैंड के इंदिरा चौक के राष्ट्रीय राजमार्ग 43 सड़क के गड्ढों जैसे तैसे अपनी जान बचा पाए है। नही तो आज बड़ी मुश्किल हो जाती आखिर राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग अपने सड़को को बनाने में कोई दिलचस्पी क्यो नही दिखाता लोग कब तक सड़को के गड्ढे में में फस कर अपनी जान से खेलते रहेंगे स्थानीय प्रशासन और जिला प्रशासन कब तक मूक दर्शक बनी रहेगी। इन विभाग के अधिकारियों के ऊपर जिला प्रशासन कोई कार्यवाही क्यो नही करती
पत्थलगांव के वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन यादव ने बताया कि शहर के बीचोबीच इस तरह के बड़े बड़े गड्ढे जो शहर की ब्यवस्था को खराब कर रहा है। लोग आने जाने में खुद को असहज महसूस कर यहां से पार हो रहे है। शहर वासियों से लेकर वाहनों में चलने वाले सभी लोग पूरी तरह परेशान है। फिर भी न तो राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग कुछ ध्यान दे रहा है न ही स्थानीय प्रशासन कोई कार्यवाही कर पा रहा है। आखिर आम लोग इन बड़े बड़े बड़े गड्ढों से कैसे आना जाना करें महिलाएं बच्चे यहां से आते जाते समय यहां के बत से बत्तर सड़क के हाल देख कर शहर वासियों और राष्ट्रीय राजमार्ग जैसे बड़े अधिकारीयो के बारे में क्या सोच रखते होंगे।
पार्षद अजय बंशल ने शहर के बीचोबीच की खराब राष्ट्रीय राजमार्ग सड़क की हाल पे कहा कि अधिकारी को अपनी जिम्मेदारी समझने की आवश्यकता है। जिनके कंधों को जिम्मेदारी मिली है उन्हें तुरंत इन खराब सड़को को ठीक कर आम जन को सुविधा मुहैया कराना चाहिए।

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