मैनपाट का पैराग्लायडिंग,कोतईबिरा की ईब रहा पिकनीक का मुख्य केन्द्र सौंदर्य के बीच बसे किलकिलेश्वर धाम मे पहुंचे धार्मिक श्रद्धालु

मुकेश अग्रवाल
पत्थलगांव-ःनया वर्ष 2023 का स्वागत को लेकर पिकनीक स्पॉट मे भीड से गुलजार रहे।,इस बार पिकनीक स्पॉटो मे नवनिशा का आगाज करने के लिए भीड अधिक इकटठा होने का अनुमान लगाया जा रहा था जो एकदम खरा उतरा। शहर से लगे अनेक पिकनीक स्पॉट पर लोगो की भीड जमा हुई,मैनपाट मे पिकनीक मनाने आने वालो की काफी भीड पहुंची।,यहा की पैराग्लायडिंग,घुडसवारी एवं तिब्बतीयों के मंदिर एवं उनके कैंप आने वाले लोगो को स्वतः ही अपनी ओर आकर्षित करें। मैनपाट शरणार्थी तिब्बतीयो के लिए बसाया गया था,यह स्थान समुद्र तल से लगभग 2हजार मीटर की उंचाई पर बसा है। घनघोर जंगलो को काट कर पहाड के उपर बसाया गया मैनपाट मे गर्मी के दौरान भी ठंड का एहसास होता है,यहा बसे शरणार्थी तिब्ती कई कैंपो मे बसे हुए है,यहा तिब्तीयो के धर्म अनुसार कई बौध मंदिर है,जिनकी सुंदरता देखते ही बनती है। यहा का टाईगर पाइंट पर बना झरना आकर्षक का प्रमुख केन्द्र है,यहा का उल्टा पानी नामक जगह का रहस्य आज भी बरकरार है,जिसके शोध मे कई वैज्ञानिक जुटे है। बताया जाता है कि पानी के साथ-साथ न्यूटल मे खडी चार चक्का वाहन भी बगैर र्स्टाट किये ही घाट की ओर बढने लगती है,जिसे देखकर यहा पहुंचने वाले लोग दांतो तले उंगली दबा लेते है। वर्तमान मे मैनपाट को सौंदर्य के हिसाब से काफी विकसित कर दिया गया है,यही कारण है कि नये साल के आने से पूर्व ही यहा के अधिकंाश होटल एवं रिसोर्ट शैलानियों द्वारा बुक करा लिये ग्रे थे।।

जिले के लोगो की पहली पसंद कोतईबिरा
शहर से लगभग साठ किलोमीटर की दूरी पर ईब नदी के किनारे बसा कोतईबिरा धार्मिक प्रर्यटन स्थल छत्तीसगढ के नक्शे मे अपनी कोई खास पहचान तो नही बना पाया,परंतु यहा की सुंदरता छत्तीसगढ के अलावा उडीसा के लोगो को भी काफी रास आती है।

यहा भगवान भोलेनाथ का प्राचीन मंदिर स्थापित है,मंदिर के बाजु से ईब नदी पूरे सबाब के साथ कल कल कर बहती हुयी लोगो के लिए काफी रोमांचक दृश्य प्रस्तुत करती है। विशालकाय चटटानो को चिरती हुयी बहती यह नदी सोना मिलने के लिए भी प्रसिद्ध मानी जाती है,बताया जाता है कि यहा पांडवो का इतिहास छुपा है,पहाड के उपर गुफा एवं कपाल द्वार है,जहा पांडव पुत्र माता कुंती के साथ अपना अज्ञातवास बिताये थे। यह क्षेत्र और भी पुरानी क्विदंतियो को लेकर ख्याति प्राप्त है। यहा प्रत्येक वर्ष लाखो की संख्या मे पिकनीक मनाने छत्तीसगढ एवं उडीसा के लोग पहुंचे।।
किलकिला का पिकनीक स्पॉट होगा गुलजार
–धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाने वाला मांड नदी के किनारे बसा किलकिलेश्वर धाम मे भी पिकनीक मनाने वालो की भीड जमा हुई। इसके लिए यहा के व्यवस्थापको द्वारा मांड नदी के घाटो की साफ सफाई करा दी गयी है। यह हमेंशा से धार्मिक स्थल के नाम से जाना जाता है,यहा बने सभी समाज के मंदिर लोगो को यहा आने के लिए अपनी ओर आकर्षित करते है,मांड नदी पर बना एनिकेट भी सुंदरता का प्रर्याय है। इसके अलावा यहा प्राकृतिक सौंदर्य की भी कमी नही है।
मंगरेलगढ है मांड नदी का उदगम स्थल
–शहर से 40 किलोमीटर दूर पूर्व मे बसा मंगरेलगढ सिद्ध शक्ति पीठ मां जगत जननी का निवास स्थल है,यह स्थान मांड नदी का उदगम स्थल कहलाता है,यहा भी चारो तरफ प्राकृतिक सौंदर्य भरा है,प्रत्येक वर्ष 1 जनवरी को जशपुर-रायगढ एवं सरगुजा से लोग यहा आकर पिकनीक मनाने का लुफ्त उठाते है। बताया जाता है कि रियासत काल मे मंगरेलगढ की मां जगत जननी सरगुजा नरेश को स्वप्न मे दर्शन देकर यहा प्रगट हुयी थी,तब से इसे सिद्ध शक्ति पीठ के नाम से जाना एवं पूजा जाता है।
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