बिजली विभाग का कारनामा*पत्थलगांव बिजली विभाग में करोडो का टेंडर फर्जीवाड़ा, बगैर टेंडर लगा दिए हजारो खंभे*

मुकेश अग्रवाल
पत्थलगांव। पत्थलगांव विद्युत् विभाग में हजारो खंभे बगैर टेंडर के ही खड़े किये जाने का मामला सामने आया है,सूत्रों के मुताबिक अधिकारियों द्वारा अपने चहेतों ठेकेदारों को बगैर निविदा के ही पहले काम आवंटित कर दिया गया और फिर टेंडर निकलने के दौरान अन्य ठेकेदारों को दूसरा काम देने का आश्वासन देकर मनमुताबिक टेंडर करवा लिया गया हैं। खबर है कि बगैर टेंडर बुलाए ही पूरे क्षेत्र में लगभग 5 हजार ऐसे खंभे लगाए गए हैं जिन पर अभी तक विद्युत लाइन सप्लाई नहीं हो सकता है खाली खड़े खम्भे अब विभाग के साथ साथ ग्रामीणों को भी मुंह चिढ़ाते नजर आ रहे है अब इस खंभे में लाइन कब लगेगी इस बात को लेकर संदेह व्याप्त है, हालांकि अधिकारी इस पूरे प्रकरण पर पर्दा डालने के लिए ऐसा कुछ भी न होने की बात कहते हैं लेकिन मौके पर खड़ी गई विद्युत पोल सारे खेल की हकीकत बयां करने के लिए काफी है। जिसके पीछे लोगों के बीच आम चर्चा है कि ऐसा केवल अपने चहेते लोगों को काम देकर धन का बंदरबांट करना है।

*5 हजार खंभे आखिर कहा कहा लगे*
पत्थलगांव कार्यपालन यंत्री विद्युत क्षेत्र का सम्पूर्ण क्षेत्रफल को यदि देखा जाए तो 30 से 35 किलोमीटर के दायरे में पूरा क्षेत्रफल सिमट जाता है वही लगभग अधिकांश गांव व पारा टोला मोहल्ला में विद्युतीकरण पूर्व में ही हो चुका है वही अब लगभग 5 हजार नए खंभे लगाए जाने का दावा किया जा रहा है जिसको लेकर सवाल उठने लाजमी है, पत्थलगांव क्षेत्र में लगभग 5 हजार विद्युत पोल बगैर टेंडर के खड़े कर देने का दावा किया गया है अधिकारियों की सांठगांठ से चहते ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए इस तरह के कार्य किया गया है की इस खेल की किसी को भनक तक नहीं लगी, और कागजों ही कागजों में ठेकेदार और अधिकारी करोड़ों रुपए का खेल खेल जाते परंतु ठेकेदारों के मध्य टेंडर को लेकर उपजे आपसी विवाद ने पूरा खेल बिगाड़ दिया मामला सब कुछ ठीक ही रहता परंतु विवाद की स्थिति अब सामने आने लगी है जब पूर्व में हो चुके खंभे गाड़ने के कार्य को लेकर खंभे खड़े कर देने के पश्चात् चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुचाने निकाले गये टेंडर में ठेकेदारों के मध्य ही विवाद की स्थिति निर्मित हो गयी जिसकी वजह से अब यहां खड़े खंबे में बिजली तार लग पाना असम्भव नजर आ रहा है,

*निविदा प्रक्रिया का पालन नहीं*
चहेते ठेकेदारों से बगेर निविदा निकाले ही हजारो खंभे लगाने का कार्य कराने के पश्चात पुरे कार्य को विधिवत करने हेतु टुकड़े टुकड़े में निविदा निकाला जाने लगा निविदा में टेंडर प्रक्रिया की निर्धारित 30 दिन की अवधि होनी चाहिए लेकिन 2 से 3 दिनों के भीतर पूरी प्रक्रिया कर ली गई । निविदा में भंडार क्रय नियमों का पालन नहीं किया गया। सबसे बड़ी बात है कि टेंडर लगने से पूर्व में हो चुके कार्य के लिए निकाले गए अधिकांश निविदा विभाग की ऑनलाइन एव ऑनलाइन टेंडर में डिस्प्ले भी नहीं किया गया है जबकि नियमानुसार सभी टेंडरों का ऑनलाइन डिस्प्ले होना था, क्षेत्र के दर्जनों गांव है जहां इस तरह का खेल विभाग द्वारा खेला गया है पूरा मामला 12 से 15 करोड़ के विद्युतीकरण का आपसी सांठगांठ कर खुला खेल खेले जाने का है।आरोप है कि अधिकारियों ने अपने चहेते ठेकेदार को पहले ही काम दे दिया और अब टेंडर की तैयारी है।

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