तस्करों के चंगुल से छुड़ाए 350 पशुधन,, गौ सेवा आयोग के सदस्य शेखर त्रिपाठी पहुंचे मौके पर दी पुलिस को सूचना ,,आरोपी फरार ,,लारीपानी की घटना

मुकेश अग्रवालपत्थलगांव — तस्करों के चंगुल से छुड़ाए गए करीब 350 पशुधन की मदद के लिए गौ सेवा आयोग के सदस्य शेखर त्रिपाठी ने पहल की है। सभी मवेशियों को देख-रेख के लिए समीपस्थ गौशालाओं और गौठानों के सुपुर्द किया गया है जहां इनके लिए चारा और पानी की समुचित व्यवस्था की जाएगी। श्री त्रिपाठी ने थाना प्रभारी को मामले में पड़ताल कर समुचित कार्यवाही करने के निर्देश भी दिए हैं।जानकारी के अनुसार लैलूंगा विकासखंड के अंतर्गत ग्राम लारीपानी में करीब 350 मवेशियों को ग्रामीणों द्वारा तस्करों के चंगुल से छुड़ाया गया है। इन मवेशियों को रविवार और सोमवार की दरम्यानी रात को अंधेरे में उड़ीसा की ओर ले जाया जा रहा था। निकालने से पहले इन्हें जंगल में रोककर रखा गया था। बड़ी संख्या में मवेशियों को जंगल के रास्ते उड़ीसा की ओर ले जाए जाने की सूचना मिलते ही सरपंच और ग्रामीण इकट्ठा होकर मौके पर पहुंचे और इन्हें लेकर जाने वाले लोगों से पूछताछ करनी शुरू की। सरपंच और ग्रामीणों ने बताया कि मवेशियों को लेकर जाने वाले लोगों के पास कोई दस्तावेज नहीं था। ऐसे में ग्रामीणों के आक्रोश से भयभीत चरवाहे मौका देखकर अंधेरे में ही भाग निकले। जिसके बाद ग्रामीणों द्वारा मवेशियों को लाकर लारीपानी के स्कूल में रखा गया।ग्रामीणों द्वारा इसकी सूचना गौ सेवा आयोग के सदस्य शेखर त्रिपाठी को दी गई। सूचना पर श्री त्रिपाठी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। इतनी बड़ी संख्या में एकत्रित मवेशियों को देखकर उन्होंने भी हैरानी जाहिर की। उन्होंने स्वयं निरीक्षण कर मवेशियों की स्थिति देखी। चारा और पानी के बिना मौके पर मौजूद कई मवेशियों को बेहाल देखकर उन्होंने पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को बुलाकर मवेशियों की जांच करने के निर्देश दिए वहीं उनके लिए तत्काल चारा और पानी की व्यवस्था करने की हिदायत भी ग्रामीणों को दी।
पुलिस को दी गई जानकारी –इस मामले की पूरी जानकारी धर्मजयगढ़ एसडीओपी श्री दीपक मिश्रा को भी दी गई गौरतलब है कि दीपक मिश्रा भी क्षेत्र से हो रही मवेशियों को अवैध तस्करी को रोकने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। श्री मिश्रा के निर्देश पर लैलूंगा थाने से प्रभारी बी एस पैंकरा भी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से वस्तुस्थिति की जानकारी ली।खुरों में ठुकी थी नाल —
मौके पर मौजूद मवेशियों में अधिकांश मवेशी ऐसे पाए गए जिनकी आयु काफी अधिक होने के कारण वे कमजोर हो चुके थे और कृषि कार्य के लिए उपयुक्त नहीं रह गए थे। और तो और कई बूढ़ी हो चुकी गाएं भी इनमें शामिल थीं। ऐसे में इन मवेशियों की तस्करी किए जाने की बातों को बल मिल रहा है। दूसरी ओर सैकड़ों मवेशी ऐसे भी मिले जिनके खुरों में नाल ठुकी हुई थी। ऐसे में माना यह जा रहा है कि इन मवेशियों को दूर-दराज के इलाकों से खरीदने के बाद इनके पैरों में नाल ठोक दिए गए ताकि इन्हें जल्दी से जल्दी हांककर छग की सीमा के पार ले जाया जा सके। श्री त्रिपाठी मवेशियों की ऐसी हालत देखकर भावुक नजर आए। उन्होंने बताया कि मवेशियों के खुरों में नाल ठोका जाना कानूनन अपराध है। उन्होंने गौशाला और गौठान समिति के सदस्यों को मवेशियों के खुरों में ठोके गए नाल जल्द से जल्द निकलवाने की हिदायत दी है। दूसरी ओर यहां हैरान करने वाली बात यह रही कि बड़ी संख्या में मवेशी होने के बावजूद कोई भी इन पर मालिकाना अधिकार का दावा करने नहीं पहुंचा। ऐसी स्थिति में इनकी तस्करी किए जाने की बात भी पुख्ता मानी जा रही है। इसे एक गंभीर मामला बताते हुए मवेशियों के साथ बरती जा रही इस क्रूरता और तस्करी के मामलों से उन्होंने गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष रामसुंदर दास महंत को भी अवगत कराने की बात कही है।
गौशाला और गोठानों के सुपुर्द किए गए मवेशी ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाते हुए तस्करों के चंगुल से मवेशियों को छुड़ा तो लिया परंतु बड़ी संख्या में मवेशी होने के कारण इनकी देख-भाल करना लोगों के लिए चुनौती बना हुआ था। स्थिति को देखते हुए गौ सेवा आयोग के सदस्य श्री त्रिपाठी ने गौ सेवा आयोग के अधिकारियों से संपर्क कर क्षेत्र के आस-पास पड़ने वाली गौशाला और गोठानों की जानकारी हासिल की। वहीं इनके संचालकों से चर्चा कर गौशाला और गोठानों की क्षमता के बारे में भी पड़ताल की। जिसके बाद सभी मवेशियों को 50 और 100 के समूहों में बांटकर क्षमतानुसार अलग-अलग गौशालाओं और गोठानों के लिए रवाना किया गया। श्री त्रिपाठी ने मौके पर ही मौजूद रहकर यह सुनिश्चित किया कि मवेशियों को गौशाला और गोठानों में भेजा जाए वहीं उन्होंने सभी संचालकों को मवेशियों के लिए चारा और पानी के समुचित इंतजाम किए जाने को लेकर सख्त हिदायत भी दी है ।।

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