108 एंबुलेंस चालक पर नर्सों से अभद्रता का आरोप, अब दो जगह नौकरी करने का मामला भी चर्चा में!

पत्थलगांव अस्पताल में विवाद से स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल; स्टाफ नर्सों की शिकायत पर बीएमओ ने जिला नोडल अधिकारी को पत्र भेजने की कही बात
एक ओर आपातकालीन एंबुलेंस की जिम्मेदारी, दूसरी ओर स्कूल में स्वीपर की नौकरी—आखिर दोनों जगह ड्यूटी का तालमेल कैसे बैठ रहा है? जांच की उठी मांग
पत्थलगांव। मरीजों को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए संचालित 108 एंबुलेंस सेवा खुद विवादों के घेरे में आ गई है। पत्थलगांव सिविल अस्पताल में पदस्थ स्टाफ नर्सों ने 108 एंबुलेंस चालक जगन्नाथ यादव पर अभद्र व्यवहार करने और बार-बार विवाद करने का आरोप लगाते हुए बीएमओ को लिखित शिकायत सौंपी है। मामला गंभीर प्रसूति मरीज को उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर करने के दौरान हुए विवाद से जुड़ा है। वहीं, चालक के ग्राम घरजियाबथान के मिडिल स्कूल में स्वीपर के पद पर भी कार्यरत होने की बात सामने आने से अब उनकी दोनों जिम्मेदारियों और ड्यूटी के तालमेल को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
गंभीर प्रसूति मरीज को रेफर करने के दौरान विवाद का आरोप
स्टाफ नर्स प्रियंका और रायकिशोरी द्वारा दी गई शिकायत के अनुसार, 16 अक्टूबर 2026 की रात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पत्थलगांव में एक गंभीर प्रसूति मरीज को उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर करने की तैयारी की जा रही थी। शिकायत में बताया गया कि मरीज Retained Placenta, Cervical Prolapse और Anemia जैसी गंभीर चिकित्सकीय समस्याओं से पीड़ित थी।
नर्सों के मुताबिक, शुरुआत में 102 एंबुलेंस की व्यवस्था की गई थी और तमता से एंबुलेंस भी उपलब्ध हो गई थी। लेकिन मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए 102 की आईडी निरस्त कर 108 एंबुलेंस की व्यवस्था आवश्यक समझी गई, ताकि रास्ते में जरूरत पड़ने पर मरीज को उपयुक्त आपातकालीन चिकित्सा सहायता मिल सके।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इसी दौरान 108 एंबुलेंस चालक जगन्नाथ यादव ने विवाद किया और स्टाफ नर्सों के साथ अभद्र व्यवहार किया। नर्सों का यह भी कहना है कि इससे पहले भी चालक द्वारा दो बार इसी प्रकार विवाद किया जा चुका है।
नर्सों का सवाल—अस्पताल में विवाद होगा तो मरीजों की देखभाल कैसे होगी?
स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों, नर्सों और आपातकालीन सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है। खासकर प्रसूति जैसी गंभीर परिस्थितियों में समय पर निर्णय और एंबुलेंस की उपलब्धता मरीज की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण होती है।
स्टाफ नर्सों ने अपनी शिकायत में कहा है कि इस तरह की घटनाओं से स्वास्थ्यकर्मियों को काम करने में परेशानी होती है और आपातकालीन सेवाएं प्रभावित होने की आशंका रहती है। उन्होंने मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की मांग की है।
अब सवाल यह है कि आखिर मरीजों की सेवा के लिए तैनात कर्मचारियों के बीच ऐसा विवाद क्यों उत्पन्न हो रहा है? क्या संबंधित अधिकारियों द्वारा इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जाएगी?
बीएमओ डॉ. जेम्स मिंज ने कहा—जिला नोडल अधिकारी को भेजेंगे शिकायत
मामले में सिविल अस्पताल के बीएमओ डॉ. जेम्स मिंज ने बताया कि स्टाफ नर्सों की ओर से शिकायत पत्र प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि शिकायत को 108 एंबुलेंस के जिला नोडल अधिकारी के पास भेजकर जांच और उचित कार्रवाई के लिए पत्र प्रेषित किया जा रहा है।
बीएमओ के इस बयान के बाद अब निगाहें जिला स्तर पर होने वाली जांच पर टिकी हैं। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
एक नौकरी एंबुलेंस में, दूसरी स्कूल में—ड्यूटी का हिसाब कौन रखेगा?
इस पूरे मामले में एक और पहलू चर्चा का विषय बना हुआ है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, 108 एंबुलेंस चालक जगन्नाथ यादव ग्राम घरजियाबथान के मिडिल स्कूल में स्वीपर के पद पर भी कार्यरत बताए जा रहे हैं।
यदि दोनों पदों पर उनकी नियुक्ति और कार्यरत होने की स्थिति की पुष्टि होती है, तो यह जानना जरूरी होगा कि दोनों जगह उनकी ड्यूटी का समय क्या है और दोनों जिम्मेदारियों का निर्वहन किस प्रकार किया जा रहा है। क्या दोनों संस्थानों में उनकी उपस्थिति और ड्यूटी का रिकॉर्ड नियमित रूप से जांचा जाता है? क्या दोनों पदों की सेवा शर्तें एक साथ कार्य करने की अनुमति देती हैं?
इन सवालों का जवाब संबंधित विभागों के रिकॉर्ड और आधिकारिक जांच से ही सामने आ सकता है। फिलहाल, केवल दो जगह कार्यरत होने की जानकारी के आधार पर किसी नियम के उल्लंघन का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। लेकिन मामला स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे दो महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवा क्षेत्रों से जुड़ा है, इसलिए इसकी जांच आवश्यक मानी जा रही है।
अगर ड्यूटी में टकराव है, तो जवाबदेही भी तय होनी चाहिए
108 एंबुलेंस सेवा आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने की महत्वपूर्ण कड़ी है। ऐसे में यह सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि चालक निर्धारित ड्यूटी के दौरान उपलब्ध रहें और अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों के साथ समन्वय बनाकर काम करें।
दूसरी ओर, स्कूल में स्वीपर के पद पर उनकी कथित नियुक्ति और ड्यूटी की स्थिति की भी संबंधित शिक्षा विभाग को पड़ताल करनी चाहिए। दोनों संस्थानों की उपस्थिति पंजिका, ड्यूटी रोस्टर और सेवा शर्तों की जांच से स्पष्ट हो सकता है कि कहीं दोनों जिम्मेदारियों के निर्वहन में टकराव तो नहीं हो रहा।
अब जांच के दो अहम बिंदु
पहला, स्टाफ नर्सों द्वारा लगाए गए अभद्र व्यवहार और बार-बार विवाद के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो तथा तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाए।
दूसरा, 108 एंबुलेंस सेवा और घरजियाबथान मिडिल स्कूल में कथित दोहरी नौकरी के मामले में संबंधित विभाग ड्यूटी रिकॉर्ड और सेवा नियमों की जांच करें।
पत्थलगांव में उठे इन सवालों का जवाब अब जांच से ही मिलेगा। आखिर आपातकालीन सेवा में तैनात चालक पर लगे आरोपों की सच्चाई क्या है? और यदि वे दो संस्थानों में कार्यरत हैं, तो दोनों जगह उनकी उपस्थिति और जिम्मेदारियों का निर्वहन किस तरह हो रहा है? इन सवालों पर संबंधित अधिकारियों की जांच और कार्रवाई का इंतजार है।