भांटामुड़ा में ‘विकास’ की सड़क या भ्रष्टाचार की बुनियाद? साढ़े तीन लाख की सीसी रोड निर्माण में बेस गायब, काली प्लास्टिक बिछाकर धड़ल्ले से ढलाई! निर्माण के दो दिन में ही टूटने लगी सड़क, गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल; जनपद CEO ने दिए जांच और भुगतान रोकने के संकेत
मुकेश अग्रवाल
पत्थलगांव। गांवों के विकास के नाम पर शासन से मिलने वाली राशि का आखिर कितना सदुपयोग हो रहा है? क्या सरकारी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता के मानकों का पालन जरूरी नहीं है? पत्थलगांव जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत गोढ़ी कला के आश्रित ग्राम भांटामुड़ा में बन रही सीसी सड़क को देखकर ऐसे ही कई सवाल खड़े हो रहे हैं। यहां 15वें वित्त आयोग की राशि से करीब साढ़े तीन लाख रुपये की लागत से बन रही सीसी सड़क में बेस तैयार किए बिना ही ढलाई किए जाने का आरोप है। ग्रामीणों का दावा है कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता की अनदेखी की जा रही है और निर्माण के महज दो दिन के भीतर ही सड़क टूटने लगी है।
बेस गायब, काली प्लास्टिक बिछाई और शुरू हो गई ढलाई!
सीसी सड़क निर्माण में निर्धारित प्रक्रिया और गुणवत्ता मानकों का पालन बेहद जरूरी होता है। लेकिन भांटामुड़ा में सामने आए निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सड़क के नीचे आवश्यक बेस तैयार करने के बजाय काली प्लास्टिक बिछाकर सीधे कंक्रीट की ढलाई की जा रही है। यदि मौके पर निर्माण की यही स्थिति है, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर सड़क की मजबूती और टिकाऊपन सुनिश्चित करने के लिए कौन जिम्मेदार है?
साढ़े तीन लाख रुपये की लागत से बनने वाली सड़क यदि शुरुआती दिनों में ही जवाब देने लगे, तो यह केवल निर्माण की गुणवत्ता का मामला नहीं, बल्कि सरकारी धन के सदुपयोग और जवाबदेही का भी सवाल है।
दो दिन में टूटने लगी सड़क, ग्रामीणों ने उठाई गुणवत्ता पर उंगली
सोमवार सुबह निर्माण स्थल पर पहुंचने पर सड़क की निर्माण प्रक्रिया को लेकर सवाल सामने आए। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। उनका आरोप है कि बेस तैयार किए बिना ढलाई किए जाने के कारण सड़क कमजोर बन रही है और निर्माण के दो दिन के भीतर ही उसमें टूट-फूट दिखाई देने लगी है।
ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों के लिए शासन द्वारा राशि उपलब्ध कराई जाती है, ताकि गांवों में टिकाऊ और उपयोगी सुविधाएं विकसित हो सकें। लेकिन यदि निर्माण में ही लापरवाही बरती गई, तो सरकारी धन खर्च होने के बावजूद ग्रामीणों को उसका अपेक्षित लाभ कैसे मिलेगा?
मौके से इंजीनियर नदारद, निगरानी पर भी सवाल
निर्माण स्थल पर निरीक्षण के दौरान आरईएस विभाग का कोई इंजीनियर मौजूद नहीं था। ऐसे में सवाल उठता है कि निर्माण कार्य की तकनीकी निगरानी कौन कर रहा है? क्या संबंधित अधिकारियों ने निर्माण की गुणवत्ता जांचने के लिए नियमित निरीक्षण किया है? और यदि सड़क निर्माण में निर्धारित मानकों की अनदेखी हुई है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
हालांकि, निर्माण में कथित अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन ग्रामीणों के आरोपों ने संबंधित विभाग और पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
CEO संजय चंद्रा का आश्वासन—होगी जांच, भुगतान पर लग सकती है रोक
मामले की जानकारी पत्थलगांव जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संजय चंद्रा को दी गई। उन्होंने बताया कि भांटामुड़ा में कराए जा रहे उक्त निर्माण कार्य की जांच कराई जाएगी। साथ ही, उन्होंने गुणवत्ता की जांच होने तक 15वें वित्त आयोग की राशि के भुगतान को रोकने की बात कही।
CEO के इस बयान के बाद अब ग्रामीणों की निगाहें जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। देखना होगा कि जांच में निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सामने आए आरोपों की क्या स्थिति निकलती है और जिम्मेदार पाए जाने वालों पर क्या कार्रवाई होती है।
अब सवाल—जांच केवल कागजों पर होगी या जिम्मेदारी भी तय होगी?
भांटामुड़ा की सीसी सड़क ने गांवों में विकास कार्यों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों की मांग है कि निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए, सड़क में इस्तेमाल सामग्री और निर्माण प्रक्रिया की पड़ताल हो तथा गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
आखिर साढ़े तीन लाख रुपये की लागत से बनने वाली सड़क का बेस ही सवालों के घेरे में हो, तो विकास की मजबूती पर भरोसा कैसे किया जाए? अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर निर्माण की हकीकत जांचते हैं या गांव की यह सड़क भी सरकारी फाइलों में विकास की एक और कहानी बनकर रह जाती है।