नौवें दिन रामकथा में उमड़ा आस्था का सैलाब, शबरी मिलन से लेकर रावण वध और राम राज्याभिषेक तक गूंजे जय श्रीराम के जयकारे भावपूर्ण कथा के साथ हुआ भव्य समापन, हवन-पूजन के बाद प्रसाद व भंडारे में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

 

मुकेश अग्रवाल

पत्थलगांव।

अग्रसेन भवन में पिछले कई दिनों से चल रही श्रीराम कथा के अंतिम दिन शनिवार को श्रद्धा, भक्ति और भावनाओं का ऐसा संगम देखने को मिला कि पूरा कथा पंडाल ‘जय श्रीराम’ के जयकारों से गूंज उठा। अयोध्या से पधारीं प्रसिद्ध कथा वाचिका इंदुमती रामायणी ने अपनी ओजपूर्ण एवं भावपूर्ण वाणी से भगवान श्रीराम के वनवास से लेकर लंका विजय और अयोध्या में राम राज्याभिषेक तक की कथा का मार्मिक वर्णन किया। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति में डूबे नजर आए।

 

30 जुलाई से 7 अगस्त तक आयोजित इस नौ दिवसीय श्रीराम कथा में प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पहुंचकर भगवान श्रीराम की कथा का रसपान किया।

अग्रसेन भवन के विशाल पंडाल में शाम 4 बजे से 7 बजे तक कथा का आयोजन किया गया। वहीं प्रतिदिन सुबह सामूहिक रुद्राभिषेक का आयोजन भी हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु जोड़ों ने भगवान शिव का अभिषेक कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

शबरी मिलन ने भावुक किया, हनुमान मिलन ने बढ़ाया उत्साह

अंतिम दिवस की कथा में कथा वाचिका इंदुमती रामायणी ने शबरी मिलन एवं उद्धार का अत्यंत भावपूर्ण प्रसंग सुनाया। भगवान श्रीराम के प्रति शबरी की अटूट भक्ति और प्रतीक्षा का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

इसके बाद सुग्रीव-हनुमान मिलन, किष्किंधा कांड और सीता माता की खोज का विस्तार से वर्णन किया गया। हनुमान जी के पराक्रम और प्रभु श्रीराम के प्रति उनकी निष्ठा का प्रसंग आते ही पूरा पंडाल जय श्रीराम और बजरंगबली के जयकारों से गूंज उठा।

लंका का चित्रण और रावण वध ने बांधा समां

कथा वाचिका ने आगे लंका नगरी, रावण के अहंकार और भगवान श्रीराम की धर्म की विजय का प्रसंग अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। रावण वध के प्रसंग के साथ ही श्रद्धालुओं ने अधर्म पर धर्म की विजय का जयघोष किया।

इसके पश्चात भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने और भव्य राम राज्याभिषेक का प्रसंग सुनाया गया। राम राज्य की कल्पना और भगवान श्रीराम के आदर्शों का वर्णन करते हुए कथा वाचिका ने कहा कि श्रीराम का जीवन केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि सत्य, मर्यादा, त्याग, कर्तव्य और आदर्श जीवन का संदेश भी देता है।

नौ दिनों तक भक्ति की बही गंगा

30 जुलाई से प्रारंभ हुई इस श्रीराम कथा के दौरान अग्रसेन भवन में नौ दिनों तक लगातार आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। कथा पंडाल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। सुबह सामूहिक रुद्राभिषेक और शाम को श्रीराम कथा के आयोजन ने पूरे नगर को भक्तिमय बना दिया।

कथा के अंतिम दिन विधिवत पूजा-अर्चना एवं हवन का आयोजन किया गया। कथा विश्राम के पश्चात श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण एवं भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।

अग्रवाल समाज की मेहनत से सफल हुआ आयोजन

इस भव्य धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में संभागीय अग्रवाल सभा के अध्यक्ष पवन अग्रवाल, जग्गी अग्रवाल, रामलाल अग्रवाल, अग्रवाल महिला मंडल सहित पूरे अग्रवाल समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा। आयोजन से जुड़े सदस्यों ने पूरे नौ दिनों तक व्यवस्थाओं को संभालते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखा।

कथा के समापन अवसर पर कथा वाचिका इंदुमती रामायणी अयोध्या ने पत्थलगांववासियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जिस तरह लोगों ने पूरे नौ दिनों तक भावपूर्ण, श्रद्धापूर्वक और अनुशासित होकर श्रीराम कथा का श्रवण किया, वह निश्चित रूप से प्रशंसनीय है। उन्होंने आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों और श्रद्धालुओं को साधुवाद देते हुए कहा कि भगवान श्रीराम की कृपा सभी पर बनी रहे।

रामकथा ने छोड़ी भक्ति और संस्कार की अमिट छाप

नौ दिनों तक चली श्रीराम कथा का समापन भले ही हो गया, लेकिन कथा के माध्यम से मिले मर्यादा, संस्कार, सत्य, सेवा और भक्ति के संदेश ने श्रद्धालुओं के मन में गहरी छाप छोड़ी। अंतिम दिन जब कथा पंडाल से श्रीराम के जयकारे गूंजे तो ऐसा लगा मानो पूरा पत्थलगांव ही राममय हो गया हो।

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