100 बिस्तरों का अस्पताल, लेकिन ब्लड के लिए मरीजों की जेब हो रही ‘खाली’! ब्लड स्टोरेज यूनिट में जांच की सुविधा नदारद, डोनर तैयार फिर भी जरूरतमंद भटकने को मजबूर; युवा कांग्रेस ने सौंपा ज्ञापन ‘खून मुफ्त में मिल जाए तो भी चढ़वाने के लिए पैसे चाहिए!’—व्यवस्थाओं पर उठे सवाल पत्थलगांव।



मुकेश अग्रवाल
पत्थलगांव
पत्थलगांव का 100 बिस्तरों वाला सिविल अस्पताल इन दिनों स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सवालों के घेरे में है। अस्पताल में जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त की व्यवस्था करने वाले ब्लड डोनेट समिति के कार्यकर्ताओं के साथ युवा कांग्रेस ने ब्लड बैंक से जुड़ी सुविधाओं की कमी को लेकर तहसील कार्यालय में प्रदर्शन किया और प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की।
मामला ऐसा है कि रक्तदान करने वाले युवा तैयार हैं, जरूरतमंद मरीज भी मौजूद हैं, लेकिन अस्पताल की व्यवस्था बीच में ‘दीवार’ बनकर खड़ी है। अस्पताल में रक्त संग्रह की सुविधा तो उपलब्ध है, लेकिन रक्त की जांच की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण मरीजों और उनके परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
डोनर बोले—हम खून दें, मरीज कहां से व्यवस्था करें?
ब्लड डोनेट समिति के मुख्य कार्यकर्ता राहुल यादव ने बताया कि समिति के सदस्य जरूरतमंद मरीजों को निःस्वार्थ भाव से रक्त उपलब्ध कराने का प्रयास करते हैं। युवाओं में रक्तदान को लेकर उत्साह भी है, लेकिन अस्पताल में ब्लड बैंक से संबंधित जरूरी सुविधाओं की कमी के कारण इस सेवा का पूरा लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है।
उनका कहना है कि रक्त उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों के परिजनों को कई बार निजी केंद्रों की ओर रुख करना पड़ता है और इसके लिए अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ती है। ऐसे में गरीब और जरूरतमंद परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है।
यानी डोनर का खून मुफ्त, लेकिन व्यवस्था की कमी के कारण मरीज की जेब पर खर्च का ‘इलाज’ जारी!
छोटी सी सुविधा की कमी, गरीब परिवारों पर बड़ा बोझ
युवा कांग्रेस के महासचिव मयंक रोहिला ने कहा कि पत्थलगांव का सिविल अस्पताल आसपास के बड़े क्षेत्र के मरीजों के लिए प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है। दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में लोग यहां इलाज कराने पहुंचते हैं।
उन्होंने कहा कि जब किसी मरीज को रक्त की आवश्यकता होती है तो स्थिति और गंभीर हो जाती है। एक तरफ युवा बढ़-चढ़कर रक्तदान कर रहे हैं, दूसरी तरफ अस्पताल में आवश्यक जांच और ब्लड बैंक संबंधी सुविधाओं की कमी के कारण जरूरतमंदों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
सरकार की मंशा मुफ्त और बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने की है, लेकिन यहां हालात ऐसे हैं कि ‘खून देने वाला भी परेशान और खून लेने वाला भी परेशान।’
100 बिस्तर का अस्पताल या सिर्फ बोर्ड पर बड़ी संख्या?
प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब अस्पताल को 100 बिस्तरों की सुविधा वाला बताया जाता है तो उसके अनुरूप मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाएं भी उपलब्ध होनी चाहिए। ब्लड बैंक जैसी महत्वपूर्ण सुविधा के अभाव में मरीजों को इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल की बिल्डिंग बड़ी हो सकती है, बिस्तर ज्यादा हो सकते हैं, लेकिन मरीज के समय पर खून न मिले तो सारी व्यवस्थाएं कागज पर ही मजबूत नजर आती हैं।
ज्ञापन सौंपकर जल्द सुविधा शुरू करने की मांग
ब्लड बैंक से जुड़ी सुविधाओं को लेकर युवा कांग्रेस एवं ब्लड डोनेट समिति ने प्रशासन से जल्द से जल्द आवश्यक जांच एवं ब्लड बैंक संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि जरूरतमंद मरीजों को रक्त के लिए निजी केंद्रों के चक्कर न लगाने पड़ें और गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।
इस दौरान पार्षद जनार्दन पंकज, अधिवक्ता अतुल त्रिपाठी, अध्यक्ष रमेश यादव, रोषू सिंधी, निशामुद्दीन, राजू गुप्ता, डिस्को नामदेव, अनमोल भगत, पूनी, मेघनन्द डहरिया, प्रकाश तिर्की, पंकज लकड़ा, रामनरेश एक्का, शुभम साहू, हरगोविंद सिंह सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसजन मौजूद रहे।
बहरहाल, पत्थलगांव के 100 बिस्तरों वाले अस्पताल में यदि रक्त की जांच जैसी जरूरी सुविधा के अभाव में मरीजों को बाहर पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं, तो सवाल सिर्फ ब्लड बैंक का नहीं, बल्कि पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था की प्राथमिकताओं का है। अब देखना यह है कि ज्ञापन फाइलों में दबता है या फिर अस्पताल में ‘खून की व्यवस्था’ के साथ-साथ व्यवस्था में भी कुछ जान आती है।