जमीन दलालो कि मिलीभगत से आदिवासी विधवा पति के मौत के बाद जमीन अपने नाम होने का कर रही इंतजार,,पत्थलगांव में जमीन हेराफेरी का मामला आया सामने आखिर कब तक जमीन दलालों से घिरे रहेगा राजस्व विभाग??

✍️मुकेश अग्रवाल
पत्थलगांव/जशपुर /
विगत दिनों छत्तीसगढ़ के गरीबों के मसीहा भूपेश बघेल के जशपुर जिले आगमन के दौरान जसपुर जिले में जमीन दलालों से मुक्ति के लिए पत्रकारों ने सवाल किया था जिसमें छत्तीसगढ़ के मुखिया भूपेश बघेल ने 15 दिवस के भीतर जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए थे किंतु आज तक मुख्यमंत्री के निर्देशों का कोई असर इस जिले में होता दिखाई नहीं पड़ रहा हैआंखिर गरीब आदिवासी परिवार कब तक यूं ही तहसील आफिसों की ठोकरें खाते फिरते रहेंगे?पत्थलगांव विधवा महिला से जमीन की रजिस्ट्री कराने अनुविभागीय रैंक के अधिकारी या स्वयं अनुविभागीय अधिकारी से एनओसी यानी अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद पत्थलगांव में आदिवासी विधवा महिला की जमीन फर्जी तरीके से रजिस्ट्री किये जाने का मामला सामने आने के बावजूद इसकी जांच ठंडे बस्ते में चली गयी है। मिली जानकारी के मुताबिक पत्थलगांव चिडरापारा निवासी विधवा महिला सबिना लकड़ा पति स्व झगनी राम की हक की जमीन पर तहसील कर्मचारियों की मिलीभगत से पति झगनी राम के नाम दर्ज जमीन को पति की मौत के बाद आदिवासी महिला की अज्ञानता का लाभ उठाकर अन्य वारिशानो ने तहसील के कर्मचारी एवं जमीन दलालों से मिली भगत कर विधवा के मृतक पति झगनी राम का नाम ही भू दस्तावेजों से विलोपित कराकर जमीन दलालो को बेच दिया। इस पूरे मामले में तहसील के कर्मचारियों की भूमिका को लेकर भी संदेह व्याप्त है,क्योंकि पति के नाम से दर्ज कब्जा काश्त की जमीन पर पति की मौत के बाद उसके हक की भूमि स्वत: ही पत्नी के नाम दर्ज होनी थी परंतु दलालो ने कर्मचारियों के साथ मिलकर राजस्व अभिलेखों से झगनिराम के पिता के फ़ौत पश्चात झगनी राम का नाम और झगनी राम की फ़ौत पश्चात विधवा महिला का नाम ही गायब कर दिया।विधवा ने दो जमीन दलालों के अलावा तहसील कार्यालय के कर्मचारियों पर भी मिली भगत का आरोप लगाया है। विधवा महिला का कहना है कि 15 सालों से भू दस्तावेजों में विलोपित पति का नाम के अलावा वह अपना नाम भी दर्ज कराने के लिए अनेक बार शिकायत कर चुकी है। महिला ने बताया कि पत्थलगांव पटवारी हल्का नंबर 06 स्थित कुल खसरा नंबर 09 रकबा 2.324 हेक्टेयर भूमि में उसके पति स्व झगनी राम का नाम पूर्व में राजस्व अभिलेखों में भूस्वामी हक में दर्ज था परंतु वर्तमान में उनका नाम बी वन में विलोपित हो चुका है झगनी राम उक्त खाते का सहखातेदार है जिसकी मृत्यु 20 फरवरी 2007 को हो चुकी है विधवा महिला अपने मृतक पति स्व झगनी के स्थान पर स्वत्वाधिकारी एवं नामांतरण की अधिकारी होने के बावजूद उक्त वाद भूमि से संबंधित राजस्व अभिलेखों में अपना नाम दर्ज किए जाने की गुहार लगा थक चुकी है। फिलहाल पूरा मामला पत्थलगांव अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के न्यायालय में चल रहा है
आदिवासी जमीन की हेराफेरी के इस मामले में बृहद पैमाने पर जांच किए जाने की आवश्यकता है
वही राजस्व कर्मी द्वारा झगनी राम के पिता की फ़ौत कटने के बाद झगनी राम का नाम आखिर क्यों दर्ज नही हो सका इस मामले की जांच पड़ताल में जूट गई है। आदिवासी जमीन की हेराफेरी के इस मामले में बृहद पैमाने पर जांच किए जाने की आवश्यकता है




