बेखौफ चोर, बेबस पुलिस शहर में अपराधियों का आतंक, जनता का भरोसा डगमगाया चोरी की घटनाओं में पीड़ित न्याय की आस लगाए बैठे

मुकेश अग्रवाल

पत्थलगांव।

कभी शांत और सुरक्षित माने जाने वाले पत्थलगांव शहर में इन दिनों चोरों की “चांदी” और पुलिस की “खामोशी” चर्चा का विषय बन गई है। हालात ऐसे हो चुके हैं कि अपराधियों में पुलिस का जरा भी खौफ नजर नहीं आता, जबकि आम नागरिक रात की नींद और दिन का चैन दोनों खो बैठे हैं।

लगातार हो रही चोरियों ने कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। शहर में एक के बाद एक बड़ी चोरी की घटनाएं हुईं, लेकिन आज तक किसी भी मामले का ठोस खुलासा नहीं हो पाया। ऐसे में लोगों के बीच यह चर्चा आम हो गई है कि आखिर चोर ज्यादा तेज हैं या पुलिस की जांच सुस्त?

स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस मानो “आंखों में पट्टी और मुंह में दही जमाकर” बैठी है, जबकि चोर बेखौफ होकर घटनाओं को अंजाम देकर फरार हो रहे हैं। स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि कई पीड़ित अब खुद ही अपने चोरी हुए सामान की तलाश में जुटने को मजबूर हैं।

बड़ी चोरियां बनी पहेली, पुलिस के हाथ अब तक खाली

पत्थलगांव थाना क्षेत्र में हुई कई बड़ी चोरियां आज भी रहस्य बनी हुई हैं।

13 मार्च 2026 को तमता स्थित श्याम बूट हाउस का ताला तोड़कर लाखों रुपये के सामान और नगदी पर चोरों ने हाथ साफ कर दिया। लेकिन अब तक पुलिस आरोपियों के करीब तक नहीं पहुंच सकी। पीड़ित आज भी थाने के चक्कर काट रहा है, मगर ठोस जवाब नहीं मिल पा रहा।

22 जनवरी को शहर के रिहायशी इलाका कोयला फैक्ट्री गली में रिंकू मेहरा के घर के दो गेट तोड़कर करीब 15 लाख रुपये के जेवरात चोरी हो गए। सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद भी जांच की रफ्तार ऐसी धीमी पड़ी कि पीड़ित परिवार को खुद ही सुराग ढूंढने की कोशिश करनी पड़ी।

2 अगस्त को अंबिकापुर रोड निवासी पिंटू अग्रवाल के घर से 15 लाख रुपये से अधिक की चोरी हुई, लेकिन इस मामले में भी अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया।

शहर में चर्चा है कि चोर आते हैं, चोरी करते हैं और आराम से निकल जाते हैं — जैसे उन्हें पता हो कि पीछा करने वाला कोई नहीं।

भगवान का दरबार भी नहीं बचा

जब अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हों तो फिर भगवान का दरबार भी कैसे सुरक्षित रह सकता है?

1 अक्टूबर 2025 को बर्फ फैक्ट्री गली में सजे मां के दरबार से अज्ञात चोरों ने चांदी के सिक्के, नगदी और मोबाइल तक चोरी कर लिए। हैरानी की बात यह है कि इतने समय बाद भी इस मामले में पुलिस के हाथ खाली ही नजर आ रहे हैं।

छोटी चोरियां तो दर्ज ही नहीं

शहर में छोटी-मोटी चोरियां अब आम बात हो गई हैं। कई पीड़ित तो थाने तक पहुंचने की जहमत भी नहीं उठाते, क्योंकि उन्हें पहले से ही यकीन नहीं रहता कि कोई कार्रवाई होगी।

यही वजह है कि अपराधियों का मनोबल लगातार बढ़ता जा रहा है और आम जनता का पुलिस पर भरोसा धीरे-धीरे कम होता दिखाई दे रहा है। लोग अब थाने जाने से भी कतराने लगे हैं।

नई उम्मीद – सख्त कार्रवाई की दरकार

जिले में नवपदस्थ वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उम्मेद सिंह से लोगों को बड़ी उम्मीदें हैं। अपनी तेज-तर्रार कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले एसएसपी से नागरिकों को भरोसा है कि वे जल्द ही इन मामलों में सख्त कदम उठाकर अपराधियों पर लगाम लगाएंगे।

एसएसपी का कहना है कि चोरी के अनसुलझे मामलों को सुलझाने के लिए नई टीम का गठन कर सभी मामलों की जांच की जाएगी और जल्द ही परिणाम सामने लाने की कोशिश की जाएगी।

डॉ. लाल उम्मेद सिंह

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, जशपुर

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