राष्ट्रीय राजमार्ग 43 में काफी अनियमितता करोड़ों के मुआवजा देने के बाद भी एन एच सड़क सीधी नहीं बनाकर बनाई जा रही तिरछी

मुकेश अग्रवाल/पत्थलगांव। भूमि अधिग्रहण के नाम पर शासन से मिलने वाले मुआवजे की बंदरबांट का मामला सामने आया है। राष्ट्रीय राजमार्ग 43 से जुड़े इस मामले में भू अर्जन की शासकीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद शासन से मुआवाजा राशि भी घोषित की जा चुकी है परंतु भू अधिग्रहण के लिए विभाग की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया है। मामला सामने आने के बाद राजमार्ग से जुड़े अधिकारियों के रवैये पर सवाल उठने लगे हैं।

उल्लेखनीय है कि मप्र के कटनी से झारखंड के रांची को जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग 43 पत्थलगांव से होकर गुजरता है। इस मार्ग पर क्राक्रीट सड़क के निर्माण और सड़क चैड़ीकरण के लिए जगह-जगह पर सरकार की ओर से भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। इसमें से पत्थलगांव से सीतापुर रोड पर स्थित करूमहुआ से करमीटिकरा तक भी भूमि अधिग्रहित की जानी है। इसके भूअर्जन की प्रशासकीय प्रक्रिया पूरी हो चुकी है वहीं सड़क के निर्माण का कार्य भी हाल ही में शुरू किया गया है। परंतु कार्य शुरू होने के बाद से ही सड़क के निर्माण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने सड़क के चैड़ीकरण में अधिग्रहित भूमि का उपयोग करने की बजाए पुरानी सड़क के उपर ही निर्माण कार्य कराने का आरोप लगाया है।

इसे लेकर कलेक्टर जशपुर से लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी तक से शिकायत की गई है। ग्रामीणों ने बताया कि करूमहुआ में 2014 में राजमार्ग 43 के सर्वे के आधार पर रोड को सीधा बनाने का प्रस्ताव पारित हुआ था एवं उसी के आधार पर रोड को सीधा बनाने हेतु भूमि भी अधिग्रहित की गई थी। भूमि स्वामियों को उक्त भूमि के एवज में मुआवजा राशि स्वीकृत होने के बावजूद एन एच 43 को प्रस्तावित नक्शे के आधार पर रोड को सीधा न बना कर टेढ़ा बनाया जा रहा है। जिन व्यक्तियों को मुआवजा मिला है उनकी जमीन पर रोड चैड़ीकरण न कराकर मेन रेाड पर ही सड़क को टेढ़ा कर बनाया जा रहा है। ग्रामीणों ने कतिपय लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए रोड के नक्शे में हेर-फेर का आरोप भी लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में जिस आधार पर नक्शा बनाया गया था उसे बिगाड़कर नया नक्शा बना दिया गया है और जिनको मुआवजा दिया गया है या फिर जिनकी मुआवजा राशि स्वीकृत हो चुकी है और मुआवजा दिए जाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है उनकी जमीनें जस की तस पड़ी हुई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रोड को टेढ़ा बनाने से जन सामान्य को असुविधा है और इससे दुर्घटना होने की संभावना लगातार बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यहां लगातार दुर्घटनाएं होती रही हैं जिसकी वजह से यह इलाका दुर्घटनाजन्य इलाके के रूप में चिन्हित किया गया है। परंतु कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए सभी चिंताओं को दरकिनार कर दिया गया है। ग्रामीणों ने सड़क निर्माण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने और पूर्व में निर्धारित नक्शे के आधार पर निर्माण कराए जाने की मांग की है ताकि क्षेत्र को दुर्घटनाओं से निजात मिल सके। उन्होंने मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग भी की है। उधर विभाग के अधिकारी मामले पर कुछ भी स्पष्ट बोलने से कतरा रहे हैं। अंबिकापुर से पत्थलगांव तक सड़क निर्माण के लिए जिम्मेदार राजमार्ग विभाग के एसडीओ नितेश तिवारी ने सड़क के नक्शे में फेरबदल या फिर सड़क के नक्शे के अनुरूप निर्माण नहीं होने से साफ इंकार किया है परंतु अधिग्रहित भूमि का उपयोग नहीं कर पाने के संबंध में वे नक्शा देखने के बाद स्थिति स्पष्ट होने की बात कहकर मामले को टालते नजर आए। उन्होंने अधिग्रहित भूमि का भविष्य में उपयोग होने की बात भी की परंतु मुआवजा बंटने के बावजूद विभाग द्वारा इसे अपने कब्जे में लेने की बात पर वे गोल मोल जवाब देते नजर आए।
एक तरफ हो रहा विस्तार
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सड़क का चैड़ीकरण केवल एक दिशा में किया जा रहा है जबकि यदि कभी भी किसी भी सड़क का विस्तार होता है तो सड़क के केंद्र से दोनों दिशाओं में चैड़ीकरण किया जाता है। ग्रामीणों ने कहना है कि सड़क के एक ही दिशा में विस्तार से सड़क के उस ओरं निर्माण के लिए जगह ही शेष नहीं बची है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों ओर एक तो फुटपाथ के लिए जगह छोड़ी जाती है ताकि पैदल या फिर साइकल जैसे छोटे वाहनों पर आने जाने वाले लोगों को असुविधा का सामना नहीं करना पड़े। वहीं मानव बसाहट वाले क्षेत्रों से गुजरने के दौरान राजमार्ग के दोनों ओर नाली का निर्माण भी कराया जाता है ताकि निस्तारी जल की समुचित तरीके से निकासी हो सके और निस्तारी का पानी सड़कों तक न पहुंचे जिससे कि सड़क जल्दी खराब न हो। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्तमान स्थिति में सड़क के निर्माण के बाद विस्तार वाली दिशा में नाली और फुटपाथ के लिए जगह ही शेष नहीं बचेगी। ग्रामीणों की बातों को सच माना जाए तो राजमार्ग के अधिकारियों के रवैये पर सवाल उठना लाजिमी हो जाता है।
करोड़ों का बंटा है मुआवजा
ग्रामीणों ने अपनी शिकायत में सड़क को सीधा करने के लिए करोड़ों रूपए का मुआवजा बांटे जाने की बात कही है। ग्रामीणों की मानें तो सरगुजा के सीतापुर से जशपुर के पत्थलगांव में प्रवेश के बाद से गोढ़ीकला तक सड़क को सीधा करने के नाम पर करीब 63 लोगों की भूमि अधिग्रहित की गई है। इसके लिए करोड़ों रू का मुआवजा बांटा जा चुका है वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनके नाम पर मुआवजा राशि पहले स्वीकृत नहीं हो सकी थी। उनके नाम पर भी राशि स्वीकृत हो चुकी है और शीघ्र ही उन्हें भी इसके चेक मिल जाने की संभावना है। ग्रामीणों का आरोप है कि करोड़ों रू की मुआवजा राशि देने के बावजूद भूमि पर न तो सड़क निर्माण किया जा रहा है और न ही इसे अपने कब्जे में लेने के लिए विभाग द्वारा कोई पहल की गई है।

सड़क का नक्शा जहां स्वीकृत है वहीं पर सड़क बनाई जा रही है। नक्शे में कोई फेरबदल नहीं हुआ है। नक्शा देखने से ही सड़क और प्रस्तावित भूमि दोनों की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। भूमि का अधिग्रहण हुआ है तो उसका उपयोग भविष्य में किया जा सकता है।
नितेश तिवारी,एसडीओ एनएच, अंबिकापुर से पत्थलगांव

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